Saturday, March 10, 2007

ADHOORI SAMAJH.

तुमहरे पास हून लेकिन जो दूरिए है समझता हून तुमहरि दोसति के बिन मेरि हसति अधूरि है समझता हून तुमको भूल पाना मुमकिन है नहि लेकिन, तुमहरे खतिर तुमहि को भूलना सबसे ज़रूरि हैन समझता हून!!!

समझ के भि जो ना समझा वो एक बात है ऐसि।।।समझ भि तो अधूरि है मैन ये भि समझता हून।।।।।

No comments: